नई दिल्ली: जंतर-मंतर के पास कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर कथित हमले और रास्ता रोकने के आरोपों की जांच तेज हो गई है। दिल्ली पुलिस अब मोबाइल फोन से बनाए गए कई वीडियो और सोशल मीडिया पर सामने आए फुटेज खंगाल रही है। इन वीडियो के जरिए कथित तौर पर पुलिसकर्मियों, महिला पुलिस अधिकारियों और कांस्टेबलों के साथ धक्का-मुक्की या हमले में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है।
वीडियो फुटेज से खंगाला जा रहा पूरा घटनाक्रम
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच में ऐसे वीडियो भी शामिल हैं जिनमें महिला पुलिस अधिकारियों और कांस्टेबलों पर हमला किए जाने का आरोप है। पुलिस इन फुटेज के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रदर्शन के दौरान घटनाएं किस क्रम में हुईं और किन लोगों की इसमें भूमिका रही।
इसके अलावा अलग-अलग स्रोतों से मिले अन्य वीडियो फुटेज भी जांचे जा रहे हैं। इनमें पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की करने, उन्हें रोकने या बैरिकेड पार करने की कोशिश से जुड़े दृश्य होने की बात कही गई है।
सरकारी कर्मचारियों पर हमले की धाराओं में FIR संभव
दिल्ली पुलिस भारतीय न्याय संहिता की उन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर सकती है, जो सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने, उनके काम में बाधा डालने और इससे जुड़े अन्य अपराधों से संबंधित हैं। यह कार्रवाई कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत उनके समर्थकों के मंगलवार और बुधवार को किए गए प्रदर्शन के बाद सामने आई है।
ये प्रदर्शन चुनावी सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ किया गया था। बुधवार को करीब 90 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी शामिल थे। पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर की ओर जाने से रोक दिया था।
राहुल गांधी को बाराखंबा पुलिस स्टेशन और प्रियंका गांधी को छत्रसाल स्टेडियम ले जाया गया था। दोनों को रात करीब 8 बजे के बाद रिहा कर दिया गया।
सोशल मीडिया पर डाले गए वीडियो भी पुलिस की नजर में
पुलिस प्रदर्शन से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो की भी जांच कर रही है। दिल्ली पुलिस ने एक सोशल मीडिया मंच से 11 पोस्ट और वीडियो हटाने या उनकी पहुंच सीमित करने को कहा था। पुलिस का आरोप है कि इनमें कार्रवाई को एकतरफा तरीके से दिखाया गया था।
पुलिस के नोटिस में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत लगाए गए प्रतिबंधों का भी उल्लेख किया गया था। पुलिस का कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों को धक्का दिया, बैरिकेड हटाए या उन्हें पार करके आगे बढ़ने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने कुछ लोगों को रोककर हिरासत में लिया।
पुलिस के मुताबिक, कुछ वीडियो में केवल पुलिस की कार्रवाई दिखाई गई, जबकि उससे पहले हुई कथित बाधा और विरोध को नहीं दिखाया गया। पुलिस ने ऐसे वीडियो को अधूरी और भ्रामक तस्वीर पेश करने वाला बताया है।
राहुल-प्रियंका समेत विपक्षी नेताओं ने जंतर-मंतर की ओर किया था मार्च
बुधवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत विपक्षी नेता और कांग्रेस कार्यकर्ता जंतर-मंतर की ओर बढ़े थे। पुलिस ने उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने शंगरी-ला होटल के पास चौराहे पर धरना दिया।
प्रियंका गांधी और कई महिला नेताओं ने संविधान की प्रति लेकर सड़क पर लेटकर विरोध जताया। इसके बाद सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया। प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया था कि सांसदों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है, जो केवल चुनाव आयुक्तों से मिलने की कोशिश कर रहे थे।
एक दिन पहले आकाशवाणी भवन में प्रवेश को लेकर भी FIR
इन हिरासतों से एक दिन पहले दिल्ली पुलिस ने 6 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और उनके समर्थकों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। उन पर आकाशवाणी भवन में जबरन प्रवेश करने का आरोप लगाया गया था।
शिकायत में कहा गया था कि नेता और सांसद बिना अनुमति परिसर में दाखिल हुए थे। इस दौरान दो सुरक्षा गार्डों की मेडिको-लीगल जांच भी कराई गई थी। दोनों ने चोट लगने का दावा किया था।
मंगलवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत करीब 260 लोगों को आकाशवाणी भवन में आठ घंटे से ज्यादा समय तक धरना देने के बाद हिरासत में लिया गया था। पुलिस का कहना था कि इस मार्च के लिए न तो अनुमति मांगी गई थी और न ही अनुमति दी गई थी।
